चीन के वैज्ञानिकों ने हाल ही में Zuchongzhi-3 (ज़ुचोंगज़ी-3) क्वांटम प्रोसेसर विकसित किया है, जिसने सुपरकंप्यूटरों की सीमा को तोड़ दिया है। यह मशीन इतनी तेज़ है कि जिन गणनाओं में दुनिया का सबसे शक्तिशाली सुपरकंप्यूटर Frontier अरबों साल लगा देगा, वही गणना Zuchongzhi-3 सिर्फ कुछ सेकंडों में कर देता है।
मानव सभ्यता की प्रगति हमेशा तकनीक के विकास से जुड़ी रही है। पहिये की खोज से लेकर इंटरनेट तक, हर तकनीकी क्रांति ने दुनिया की दिशा बदल दी। अब बारी है एक और प्रौद्योगिकी क्रांति की – जिसका नाम है क्वांटम कंप्यूटिंग।

🔹 क्वांटम कंप्यूटर क्या होता है?
सामान्य कंप्यूटर जिनका हम रोज़ इस्तेमाल करते हैं (लैपटॉप, मोबाइल, सुपरकंप्यूटर) वे सभी क्लासिकल कंप्यूटर कहलाते हैं।
- इनमें सूचना को बिट (0 या 1) के रूप में प्रोसेस किया जाता है।
- जबकि क्वांटम कंप्यूटर में क्यूबिट (Qubit) का प्रयोग होता है।
क्यूबिट की विशेषताएँ
- सुपरपोज़िशन (Superposition): क्यूबिट एक ही समय पर 0 और 1 दोनों हो सकता है।
- एंटैंगलमेंट (Entanglement): दो क्यूबिट्स आपस में इस तरह जुड़ सकते हैं कि एक की स्थिति दूसरे को तुरंत प्रभावित कर सकती है।
- इंटरफेरेंस (Interference): क्यूबिट्स की तरंग-सदृश प्रकृति उन्हें तेज़ और जटिल गणना करने देती है।
👉 यही कारण है कि क्वांटम कंप्यूटर एक साथ लाखों गणनाएँ कर सकते हैं, जबकि क्लासिकल कंप्यूटर को एक-एक करके गणना करनी पड़ती है।
🔹 Zuchongzhi-3 क्वांटम प्रोसेसर की तकनीकी संरचना
चीन के University of Science and Technology (USTC) ने इसे विकसित किया है। यह अब तक का सबसे शक्तिशाली क्वांटम प्रोसेसर माना जा रहा है।
तकनीकी विवरण
- क्यूबिट्स की संख्या: 105 सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स
- कपलर्स (Couplers): 182 (क्यूबिट्स को आपस में जोड़ने के लिए)
- ग्रिड संरचना: 15 × 7
- कोहेरेंस टाइम: 72 माइक्रोसेकंड
- सिंगल-क्यूबिट गेट फिडेलिटी: 99.90%
- टू-क्यूबिट गेट फिडेलिटी: 99.62%
- रीडआउट फिडेलिटी: ~99.18%
👉 ये आँकड़े बताते हैं कि Zuchongzhi-3 न सिर्फ तेज़ है बल्कि बेहद सटीक और विश्वसनीय (highly reliable) भी है।
🔹 Zuchongzhi-3 की खासियतें
चीन के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित Zuchongzhi-3 (या Zuchongzhi 3.0) की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएँ:
✅ 105 सुपरकंडक्टिंग क्यूबिट्स
✅ 182 कपलर्स (क्यूबिट्स को आपस में जोड़ने के लिए)
✅ 15 × 7 की ग्रिड संरचना
✅ कोहेरेंस टाइम: लगभग 72 माइक्रोसेकंड
✅ गेट फिडेलिटी: 99.90% (सिंगल-क्यूबिट), 99.62% (टू-क्यूबिट)
✅ रीडआउट फिडेलिटी: ~99.18%
🔹 कितना तेज़ है Zuchongzhi-3?
वैज्ञानिकों ने इसका परीक्षण Random Circuit Sampling (RCS) नामक बेंचमार्क से किया।
चीन के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित Zuchongzhi-3 (या Zuchongzhi 3.0) की कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएँ:
- इसमें Zuchongzhi-3 ने 83 क्यूबिट और 32 साइकिल वाली गणना सिर्फ सैकड़ों सेकंडों में पूरी कर दी।
- वही गणना सुपरकंप्यूटर Frontier को करने में लगभग 6 अरब साल लग जाते।
- गूगल का मशहूर Sycamore प्रोसेसर (2019) इसी काम में लगभग 10 लाख गुना पीछे है।
🔹 गूगल Sycamore बनाम Zuchongzhi-3
2019 में गूगल ने अपने Sycamore क्वांटम प्रोसेसर के साथ क्वांटम सुप्रीमेसी का दावा किया था।
- Sycamore ने 200 सेकंड में एक ऐसी गणना की जिसे क्लासिकल कंप्यूटर को हजारों साल लगते।
- लेकिन Zuchongzhi-3 उसी तरह के बेंचमार्क में Sycamore से 10 लाख गुना तेज़ साबित हुआ।
👉 इसका मतलब है कि चीन ने क्वांटम कंप्यूटिंग की दौड़ में गूगल और अमेरिका को काफी पीछे छोड़ दिया है।
🔹 क्वांटम सुप्रीमेसी क्या है?
क्वांटम सुप्रीमेसी वह स्थिति है जब क्वांटम कंप्यूटर ऐसी गणना कर दे जिसे दुनिया का सबसे तेज़ क्लासिकल सुपरकंप्यूटर भी व्यावहारिक समय में नहीं कर सकता।
- 2019: गूगल ने दावा किया था।
- 2020-21: चीन ने Zuchongzhi-2 से कुछ परिणाम दिखाए।
- 2025: Zuchongzhi-3 ने इस दौड़ में निर्णायक बढ़त बना ली।
🔹 Zuchongzhi-3 के संभावित उपयोग
हालाँकि अभी यह प्रोसेसर सिर्फ विशेष गणनाओं (benchmarking tasks) के लिए उपयोगी है, लेकिन भविष्य में इसके अनुप्रयोग असाधारण होंगे:
- दवा और चिकित्सा अनुसंधान
- नई दवाओं और प्रोटीन संरचनाओं का विश्लेषण।
- कैंसर और दुर्लभ बीमारियों के इलाज में क्रांति।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- एआई एल्गोरिद्म को पहले से कहीं तेज़ ट्रेन करना।
- रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग में बड़ा बदलाव।
- साइबर सुरक्षा (Cryptography)
- वर्तमान एन्क्रिप्शन सिस्टम को तोड़ना।
- नए और सुरक्षित एन्क्रिप्शन सिस्टम बनाना।
- जलवायु मॉडलिंग
- ग्लोबल वार्मिंग और मौसम पूर्वानुमान की सटीक भविष्यवाणी।
- खगोल विज्ञान और ब्रह्मांड अध्ययन
- ब्लैक होल, डार्क मैटर और ब्रह्मांड की उत्पत्ति की बेहतर समझ।
🔹 चुनौतियाँ
क्वांटम कंप्यूटिंग जितनी रोमांचक है, उतनी ही चुनौतियों से भरी हुई भी है।
- क्यूबिट स्थिरता (Qubit Stability): क्यूबिट्स बहुत नाज़ुक होते हैं और आसानी से डेकोहेर हो जाते हैं।
- कोहेरेंस टाइम छोटा: माइक्रोसेकंड स्तर पर ही क्यूबिट स्थिर रह पाते हैं।
- इंफ्रास्ट्रक्चर महँगा: इसे चलाने के लिए अत्यधिक ठंडा (near absolute zero) वातावरण चाहिए।
- प्रैक्टिकल उपयोग अभी दूर: रोज़मर्रा के उपयोग के लिए इसे और विकसित करना होगा।
- बड़े पैमाने पर क्वांटम कंप्यूटर बनाना अभी संभव नहीं है।
🔹 निष्कर्ष
चीन का Zuchongzhi-3 क्वांटम प्रोसेसर मानव इतिहास में एक अभूतपूर्व तकनीकी उपलब्धि है।
जहाँ सुपरकंप्यूटर अरबों साल में गणना पूरी करते, वहीं यह प्रोसेसर कुछ सेकंड में काम कर देता है।
यह सिर्फ कंप्यूटिंग की गति बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला मोड़ है। आने वाले वर्षों में क्वांटम कंप्यूटिंग दवा, एआई, सुरक्षा, और अंतरिक्ष अनुसंधान – हर क्षेत्र को बदल डालेगी।
📚 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Zuchongzhi-3 क्वांटम प्रोसेसर क्या है?
यह चीन द्वारा विकसित एक सुपरकंडक्टिंग क्वांटम प्रोसेसर है, जिसमें 105 क्यूबिट्स और 182 कपलर्स हैं। यह दुनिया के सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर से भी कई गुना तेज़ जटिल गणनाएँ कर सकता है।
Zuchongzhi-3 कितना तेज़ है?
Zuchongzhi-3 ने एक ऐसी गणना कुछ सौ सेकंडों में पूरी कर दी जिसे सुपरकंप्यूटर Frontier को करने में लगभग 6 अरब साल लगते। यानी यह लगभग क्वॉड्रिलियन (10¹⁵) गुना तेज़ है।
क्वांटम कंप्यूटर और सुपरकंप्यूटर में क्या अंतर है?
सुपरकंप्यूटर बिट (0 और 1) पर काम करते हैं और एक समय में एक गणना करते हैं।
क्वांटम कंप्यूटर क्यूबिट (Qubit) पर आधारित होते हैं जो एक साथ 0 और 1 दोनों हो सकते हैं। इसलिए वे समानांतर रूप से असंख्य गणनाएँ कर सकते हैं।
क्वांटम सुप्रीमेसी (Quantum Supremacy) क्या है?
जब कोई क्वांटम कंप्यूटर ऐसी गणना कर दे जिसे दुनिया का सबसे शक्तिशाली क्लासिकल सुपरकंप्यूटर भी व्यावहारिक समय में न कर पाए, तो इसे क्वांटम सुप्रीमेसी कहा जाता है।
क्या क्वांटम कंप्यूटर आम लोगों के लिए उपलब्ध हैं?
अभी नहीं। वर्तमान में क्वांटम कंप्यूटर सिर्फ शोध संस्थानों और उच्चस्तरीय प्रयोगशालाओं तक सीमित हैं। इन्हें चलाने के लिए बेहद ठंडा (near absolute zero) वातावरण और महँगा इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए।
भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग का क्या असर होगा?
भविष्य में यह तकनीक दवा खोज, साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मौसम पूर्वानुमान और ब्रह्मांड अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में क्रांति ला सकती है।



