Numerical Relativity से एक नई दिशा। विज्ञान में अक्सर यह कहा जाता है कि बिग बैंग के पहले कुछ भी नहीं था, लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन ने इस धारणा को चुनौती दी है। लंदन के किंग्स कॉलेज के कॉस्मोलॉजिस्ट यूजीन लिम और उनके सहयोगियों ने Numerical Relativity का उपयोग करके यह पता लगाने की कोशिश की है कि क्या बिग बैंग से पहले कुछ था।
संख्यात्मक सापेक्षता (Numerical Relativity), आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता (General Relativity) के समीकरणों को हल करने का कंप्यूटेशनल तरीका है। यह तब काम आता है जब पारंपरिक गणितीय तरीके असफल हो जाते हैं, जैसे ब्लैक होल या बिग बैंग जैसी चरम परिस्थितियों में।

ब्रह्मांड के उत्पत्ति के बारे में सोचते ही हमारे दिमाग में पहला सवाल आता है – “बिग बैंग के पहले क्या था?” परंपरागत रूप से इसे अनसुलझा और वैज्ञानिक रूप से “अर्थहीन” माना गया है। लेकिन अब सुपरकंप्यूटर और Numerical Relativity ने इस सवाल को वैज्ञानिक रूप से जांचने का रास्ता खोला है।
🧠 Numerical Relativity क्या है?
Numerical Relativity में सुपरकंप्यूटर का उपयोग करके ब्रह्मांड के शुरुआती क्षणों का सटीक मॉडल तैयार किया जाता है।
- यह तकनीक आइंस्टीन के समीकरणों को डिजिटल रूप में हल करती है।
- ब्लैक होल विलय (Black Hole Merger) और गुरुत्वाकर्षण तरंगों (Gravitational Waves) का अध्ययन पहले इसी तकनीक से हुआ।
- अब वैज्ञानिक इसे बिग बैंग और उसके पहले की स्थितियों को समझने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
🔍 बिग बैंग से पहले की संभावनाएँ
Numerical Relativity के माध्यम से वैज्ञानिक कई नई अवधारणाओं का अध्ययन कर रहे हैं:
1. सायक्लिक ब्रह्मांड (Cyclic Universe)
सायक्लिक ब्रह्मांड का विचार यह कहता है कि ब्रह्मांड विस्तार और संकुचन के अनंत चक्र में चलता रहता है।
- यह “Big Bounce” सिद्धांत पर आधारित है।
- यदि सही साबित होता है, तो बिग बैंग केवल एक नया चक्र शुरू करने वाली घटना होगी।
2. मल्टीवर्स सिद्धांत (Multiverse Theory)
मल्टीवर्स का मतलब है कि हमारा ब्रह्मांड अकेला नहीं है। कई अन्य ब्रह्मांड भी मौजूद हैं।
- वैज्ञानिक सोचते हैं कि हमारे ब्रह्मांड ने कभी किसी अन्य ब्रह्मांड से टकराया हो सकता है।
- इससे संभावित निशान, जैसे Cosmic Microwave Background (CMB) में असामान्य पैटर्न, मिल सकते हैं।
3. गुरुत्वाकर्षण तरंगें और बिग बैंग
बिग बैंग से पहले की स्थितियों को समझने के लिए Primordial Gravitational Waves पर शोध हो रहा है।
- ये तरंगें ब्रह्मांड के प्रारंभिक क्षणों की झलक देती हैं।
- इन्हें खोजकर वैज्ञानिक बिग बैंग से पहले की शर्तों का अनुमान लगा सकते हैं।
4. प्रारंभिक ब्रह्मांडीय मॉडल
संख्यात्मक सापेक्षता के माध्यम से वैज्ञानिक अब ब्रह्मांड के आरंभिक पदार्थ और ऊर्जा की स्थिति का अध्ययन कर सकते हैं।
- इससे नए भौतिक सिद्धांत (New Physics) की खोज हो सकती है।
- यह ब्रह्मांड के संकुचन और विस्तार की प्रक्रिया को बेहतर समझने में मदद करेगा।
🖥️ सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन का महत्व
सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन के बिना यह शोध संभव नहीं है।
- वैज्ञानिक अब तीव्र विस्तार (Rapid Expansion) और संकुचन (Collapse) जैसी चरम स्थितियों को मॉडल कर सकते हैं।
- इससे पूर्व-बिग बैंग परिस्थितियों के लिए सटीक पूर्वानुमान मिल सकते हैं।
- इन सिमुलेशनों का उद्देश्य केवल अनुमान नहीं, बल्कि वास्तविक ब्रह्मांडीय डेटा के साथ मेल करना है।
उदाहरण: Eugene Lim, Katy Clough और Josu Aurrekoetxea की टीम ने हाल ही में सुपरकंप्यूटर का उपयोग करके सायक्लिक ब्रह्मांड और मल्टीवर्स टकराव की संभावनाओं का अध्ययन किया।
🌟 विज्ञान और दार्शनिक दृष्टिकोण
बिग बैंग के पहले की खोज केवल वैज्ञानिक नहीं, बल्कि दार्शनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
- यह सवाल उठता है कि क्या ब्रह्मांड का अंत और पुनर्जन्म संभव है।
- क्या समय और स्थान का कोई सीमित आरंभ है, या ब्रह्मांड अनंत है?
📚 निष्कर्ष
संख्यात्मक सापेक्षता (Numerical Relativity) और सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन के माध्यम से, वैज्ञानिक बिग बैंग से पहले की स्थितियों का अध्ययन कर रहे हैं। यह शोध ब्रह्मांड के आरंभिक क्षणों और उसके विकास को समझने में सहायक हो सकता है।
📚 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
बिग बैंग से पहले क्या था?
संख्यात्मक सापेक्षता (Numerical Relativity) के अनुसार, बिग बैंग से पहले ब्रह्मांड सायक्लिक चक्र, मल्टीवर्स या नए भौतिक नियमों के तहत हो सकता है।
संख्यात्मक सापेक्षता (Numerical Relativity) क्यों जरूरी है?
यह सुपरकंप्यूटर की मदद से आइंस्टीन के समीकरणों को चरम स्थितियों में हल करने का तरीका है, जो पारंपरिक गणित से संभव नहीं।
क्या सुपरकंप्यूटर से हमें ब्रह्मांड के आरंभ का पता चल सकता है?
सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन ब्रह्मांड के प्रारंभिक क्षणों का सटीक मॉडल देने में मदद कर सकते हैं।
मल्टीवर्स सिद्धांत क्या है?
यह विचार है कि हमारा ब्रह्मांड अकेला नहीं है और अन्य ब्रह्मांडों के साथ टकराव की संभावना है।
सायक्लिक ब्रह्मांड क्या है?
यह सिद्धांत बताता है कि ब्रह्मांड अनंत चक्रों में विस्तार और संकुचन करता रहता है।



