Viking Mission और Mars पर जीवन: मानव सभ्यता के लिए यह प्रश्न हमेशा से आकर्षक रहा है – क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं? और अगर नहीं, तो सबसे नज़दीकी जीवन कहां मिलेगा? जब भी इस सवाल की बात आती है, तो हमारी नज़रें सीधे मंगल ग्रह (Mars) की ओर उठ जाती हैं।
मंगल को अक्सर पृथ्वी का “छोटा भाई” कहा जाता है, क्योंकि इसका वातावरण और सतह हमारे ग्रह से कुछ हद तक मिलती-जुलती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्राचीन काल में मंगल पर नदियाँ और झीलें बहती थीं। यही वजह है कि 1970 के दशक में NASA ने पहली बार मंगल पर Viking मिशन भेजा, ताकि वहां जीवन की खोज की जा सके।
लेकिन अब, लगभग 50 साल बाद, वैज्ञानिक डिर्क शुल्ज़-माकुच (Dirk Schulze-Makuch) ने एक साहसिक दावा किया है –
👉 शायद Viking Mission और Mars पर जीवन से जुड़े सबूत हमें मिल गए थे, लेकिन अनजाने में हमने उन्हें खो भी दिया।

🛰️ Viking Mission क्या था?
NASA ने 1975 में दो अंतरिक्ष यान – Viking 1 और Viking 2 – को मंगल पर भेजा।
इनका उद्देश्य था:
- मंगल की सतह की तस्वीरें लेना।
- वहां के वातावरण और मिट्टी का अध्ययन करना।
- सबसे महत्वपूर्ण – मंगल पर जीवन के किसी भी संकेत को खोजना।
Viking landers विशेष प्रयोगशालाओं से लैस थे। उन्होंने मंगल की मिट्टी के नमूनों पर कई तरह के परीक्षण किए। इन परीक्षणों का सबसे अहम सवाल यही था – क्या मंगल पर जीवन मौजूद है?
💧 पानी डालने वाला प्रयोग और उसका परिणाम
Viking landers ने मंगल की मिट्टी में पानी मिलाकर देखा कि क्या वहां किसी प्रकार का सूक्ष्मजीव (microbe) मौजूद है।
पृथ्वी पर यह तरीका कारगर है, क्योंकि सूक्ष्मजीव पानी के संपर्क में आकर सक्रिय हो जाते हैं।
लेकिन मंगल की परिस्थितियाँ बहुत अलग हैं। यह ग्रह बेहद ठंडा और शुष्क है। वहां की मिट्टी में नमक और ऑक्सीडाइजिंग केमिकल्स पाए जाते हैं।
डिर्क शुल्ज़-माकुच का कहना है कि अगर मंगल पर जीवन मौजूद था, तो वह शायद बेहद शुष्क और नमकीन वातावरण में जीने का आदी था। ऐसे में अचानक मिट्टी के नमूनों पर पानी डालने से वे सूक्ष्मजीव मर गए होंगे।
यानी NASA ने अपनी ही जांच में अनजाने में मंगल पर जीवन होने के संभावित सबूत नष्ट कर दिए।
यानी Viking Mission और Mars पर जीवन की खोज का वह मौका हाथ से निकल गया।
⚡ Labeled Release Experiment: जीवन या रासायनिक प्रतिक्रिया?
Viking मिशन का सबसे चर्चित प्रयोग था Labeled Release Experiment।
इसमें मंगल की मिट्टी में रेडियोधर्मी कार्बन से युक्त पोषक तत्व डाले गए। उम्मीद थी कि अगर वहां सूक्ष्मजीव हैं तो वे इन पोषक तत्वों को खाकर गैस उत्सर्जित करेंगे।
परिणाम चौंकाने वाले थे –
👉 मिट्टी से अचानक गैस का उत्सर्जन हुआ, जैसे कोई जैविक गतिविधि हो रही हो।
शुरुआत में वैज्ञानिकों को लगा कि यह जीवन का प्रमाण हो सकता है। लेकिन बाद में इसे केवल रासायनिक प्रतिक्रिया मानकर खारिज कर दिया गया।
आज भी यह प्रयोग Viking Mission और Mars पर जीवन की बहस का सबसे रहस्यमय हिस्सा माना जाता है।
🔬 Gas Chromatograph–Mass Spectrometer और ऑर्गेनिक्स की कमी
एक और प्रयोग, जिसे Gas Chromatograph–Mass Spectrometer (GC-MS) कहते हैं, उसने मंगल की मिट्टी में कोई भी ऑर्गेनिक यौगिक (Organic Molecules) नहीं पाया।
यह परिणाम निराशाजनक था, क्योंकि बिना ऑर्गेनिक्स के जीवन की संभावना लगभग शून्य मानी गई।
लेकिन अब सवाल उठता है –
क्या सच में वहां कोई ऑर्गेनिक अणु नहीं थे?
या फिर Viking के उपकरणों ने उन्हें पहचानने से पहले ही नष्ट कर दिया?
🧪 Hydrogen Peroxide Life Hypothesis
शुल्ज़-माकुच और अन्य वैज्ञानिकों ने एक दिलचस्प थ्योरी दी –
👉 मंगल पर मौजूद सूक्ष्मजीव शायद Hydrogen Peroxide (H₂O₂) आधारित जीवन जीते हों।
Hydrogen Peroxide के फायदे मंगल पर जीवन के लिए:
- यह बेहद ठंडे वातावरण में तरल अवस्था में रह सकता है।
- यह पानी और ऑक्सीजन का स्रोत बन सकता है।
- यह मिट्टी में नमी सोखने में मदद करता है।
लेकिन Hydrogen Peroxide बेहद अस्थिर होता है। जब Viking ने मिट्टी को गरम किया, तो इसने खुद को और आसपास के ऑर्गेनिक्स को नष्ट कर दिया।
यानी जीवन था, पर हमारी टेस्टिंग पद्धति ने उसे मिटा दिया।
💧 पानी क्यों ज़हर साबित हो सकता है?
धरती पर पानी = जीवन, लेकिन मंगल पर पानी = ज़हर हो सकता है।
कारण यह है कि मंगल पर संभावित जीवन बेहद शुष्क माहौल में अनुकूलित हो चुका होगा।
ऐसे जीवों के लिए पानी की अधिक मात्रा सेल वॉल (Cell Wall) को तोड़ सकती है, और वे मर सकते हैं।
यानी NASA ने मंगल की मिट्टी में पानी डालकर अनजाने में संभावित जीवन के सबूत ‘खो दिए’ या उन्हें नष्ट कर दिया।”
❓ अगर यह सच है तो इसका क्या मतलब होगा?
अगर शुल्ज़-माकुच की थ्योरी सही है, तो इसका अर्थ है कि:
- मानव ने लगभग 50 साल पहले मंगल पर जीवन का सामना किया था।
- लेकिन हमने अपनी वैज्ञानिक धारणाओं की वजह से उसे पहचान नहीं पाया।
- यह एक सबक है कि हमें Alien Life को खोजने के लिए पृथ्वी-आधारित सोच से बाहर निकलना होगा।
संक्षेप में कहें तो Viking Mission और Mars पर जीवन की खोज का सबसे अहम सुराग हमारे हाथ से निकल गया।
🚀 भविष्य की चुनौतियाँ: कैसे खोजें जीवन बिना नष्ट किए?
अब जब कई नई मिशन मंगल और अन्य ग्रहों की ओर भेजे जा रहे हैं, तो यह सवाल बेहद अहम हो जाता है –
👉 कैसे हम जीवन की खोज करें, बिना उसे नष्ट किए?
आने वाले मिशन
- ExoMars (ESA/Roscosmos): गहराई में जाकर मिट्टी की ड्रिलिंग करेगा।
- Mars Sample Return (NASA/ESA): मंगल से नमूने वापस लाने की योजना।
- Europa Clipper और Enceladus Mission: बर्फीली चंद्रमाओं पर जीवन की खोज।
नई सावधानियाँ
- प्रयोगों में पानी या गरमी का उपयोग सावधानी से करना।
- विभिन्न बायोकैमिस्ट्री (जैसे Hydrogen Peroxide life) को ध्यान में रखना।
- नमूनों को नष्ट किए बिना उनकी जांच करना।
🌍 निष्कर्ष – क्या हमने 50 साल पहले जीवन के सबूत खो दिए?
डिर्क शुल्ज़-माकुच का यह विचार केवल एक वैज्ञानिक बहस नहीं है, बल्कि एक दर्पण है जो हमें हमारी सीमाएँ दिखाता है।
हो सकता है कि Viking Mission ने जीवन के संकेत पाए हों, लेकिन हमारी “धरती जैसी सोच” ने उन्हें सही ढंग से समझने से रोक दिया।
अगर यह सच है, तो इसका मतलब है –
👉 इंसान ने पहली बार Alien Life के संभावित सबूत देखे भी और अनजाने में नष्ट भी कर दिए – बिना समझे।
भविष्य की खोजों में यह घटना हमें सिखाती है कि जब हम ब्रह्मांड में जीवन की तलाश करेंगे, तो हमें धरती-केन्द्रित सोच से बाहर निकलकर नई दृष्टि और विनम्रता के साथ काम करना होगा।
📚 FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
Viking Mission क्या था?
Viking Mission नासा का 1976 में मंगल पर भेजा गया एक ऐतिहासिक मिशन था, जिसका मुख्य उद्देश्य मंगल ग्रह पर जीवन (Life on Mars) के संकेत तलाशना था। इसमें दो स्पेसक्राफ्ट (Viking 1 और Viking 2) ने मंगल की मिट्टी और वातावरण का अध्ययन किया।
वैज्ञानिक क्यों मानते हैं कि Viking Mission ने जीवन के सबूत खो दिए?
कुछ वैज्ञानिकों का दावा है कि Viking Mission और Mars पर जीवन से जुड़े प्रयोग में नासा ने मिट्टी पर ज़्यादा पानी डाल दिया। अगर वहाँ सूक्ष्मजीव (microbes) मौजूद थे, तो पानी डालने से वे नष्ट हो सकते थे। इसलिए संभव है कि हमने खुद ही जीवन के सबूत मिटा दिए।
क्या Viking Mission ने Mars पर जीवन की खोज की थी?
Viking Mission के प्रयोगों से मिले डेटा ने संकेत दिए कि मिट्टी में कोई अजीबोगरीब रासायनिक प्रतिक्रिया हुई थी। कुछ वैज्ञानिक इसे जीवन के सबूत मानते हैं, जबकि कुछ का मानना है कि यह केवल मिट्टी की रासायनिक संरचना का असर था।
क्या मंगल पर आज भी जीवन हो सकता है?
हाँ, यह संभव है। Mars पर भूमिगत बर्फ और नमकयुक्त क्षेत्रों में सूक्ष्मजीवों के जीवित रहने की संभावना है। हाल ही में हुए शोध बताते हैं कि मंगल पर जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ मौजूद हो सकती हैं।
इस घटना से हमें क्या सीख मिलती है?
Viking Mission और Mars पर जीवन की खोज से यह सीख मिलती है कि हमें अंतरिक्ष में प्रयोग करते समय केवल “धरती जैसी सोच” से काम नहीं लेना चाहिए। हमें नई दृष्टि, धैर्य और खुली सोच के साथ खोज करनी होगी।



